बागड़ो नाची सामण मैं (©®Song Cast)


👉 हरियाणवी गीत: बागड़ो नाची सामण मैं..

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मेरी झाँझरा का जोड़ा, हॉय शोर करण लाग्या।

जद चाली मोरणी बणके, कईयां का दिल आग्या।

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नीर भरण गई मैं, कुएँ पे नीले दामण मैं।

रे सिर पे टोकणी धर के, बागड़ो नाची सामण मैं।

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(1)

इसा हाल्या दामण रे, हॉय रे हॉय सामण मैं।

रे कमर पे दो-दो मटके थे, अर गात पड़ै था हल्वा सा।

इसी चमकी नाथ नगीने जो, रूप का पाटया जलवा सा।

होंठ रसीले लागैं थे, जणू नूण हो जामण मैं।

रे सिर पे टोकणी....

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(2)

इसा छम-छम करके नाची मैं, मन्ने देख के बादल बरस गया।

इसा खोग्या "फरिश्ता" मेरे में, वो लिखण ते भी तरस गया।

पूरी की पूरी भीज गई, फिर लागी काँपण मैं।

रे सिर पे टोकणी.... 

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इसा हाल्या दामण रे, हॉय रे हॉय सामण मैं।

इसा हाल्या दामण रे, हॉय रे हॉय सामण मैं।

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इस हरियाणवी गीत से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक बधाई! 

प्रेषक: प्रदीप सिंघल (जीन्द वाले)

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